धर्म / ज्योतिष

भजन परमात्मा को सुनाने वाले बन जाओ दुनिया सुनने के लिए द्वार पर मिलेगी-आचार्य रामदयालजी महाराज

  • माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में श्रीमद् भागवत एवं वाणीजी प्रवचन सप्ताह का आयोजन 13 सितम्बर से

भीलवाड़ा। जीवन में भजन करने का सौभाग्य हर किसी को प्राप्त नहीं होता है। राम गुरू की कृपा के बिना कोई भजन नहीं कर सकता है। अज्ञानवाद, अहंकारवाद एवं अर्थवाद के बिना कोई कारण नहीं है जो हमे भजन करने से रोक सके। सकारात्मक सोच व्यक्तिवाद से समष्टिवाद की ओर ले जाती है वहीं नकारात्मक सोच स्वयं के संकल्प से भी दूर कर देती है। जीवन में हमारी विचारधारा हमेशा पॉजिटिव होनी चाहिए। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत बुधवार को दैनिक सत्संग में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि हमेशा खुद को सही ओर दूसरों को गलत मानने की प्रवृति ही संघर्षो का मूल कारण है। जिसने हमे सुनाने की ताकत दी उस परमात्मा को भी हम सुनाते है। हम दुनिया को भजन सुनाने वाला बनना चाहते पर परमात्मा को नहीं सुनाना चाहते। जिस दिन हमारे दिल से प्रेम के साथ गाया गया भजन परमात्मा को सुना देंगे उस दिन दुनिया हाथ जोड़कर सुनने के लिए दरवाजे पर खड़ी होगी। आचार्यश्री ने कहा कि भगवान के भजन के लिए राग नहीं अनुराग चाहिए। परमात्मा दिल से सुनते है, भजन दिल से बोला जाता है राग कंठ से नहीं। परमात्मा ऐसे भजन ह्दय एवं अर्न्तात्मा से सुनते है। हम परमात्मा की कृपा की बजाय दुनिया की प्रशंसा व तारीफ चाहते है। साधक अपनी भक्ति के संकल्प से राम गुरू को प्राप्त कर सकता है। ऐसे साधक का लक्ष्य आत्मकल्याण का होता एवं संकल्प के धनी होते है। आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि तिलक हमारी सनातन संस्कृति का परम तत्व है लेकिन आजकल कई लोगों को तिलक लगाने में भी शर्म आती है। सिर पर तिलक हमाारी सनानत संस्कृति की पहचान है। हमे अपनी संस्कृति पर गर्व होना चाहिए।

आचार्य रामदयाल महाराज ने बताया कि स्वामी रामचरणजी महाराज की पावन भूमि पर उनकी कृपा से विश्व शांति चातुर्मास समिति द्वारा विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से चातुर्मास के दौरान 13 से 20 सितम्बर तक श्रीमद् भागवत एवं वाणीजी प्रवचन सप्ताह का आयोजन होगा। इस दौरान 108 वाणी पाठ एवं 108 भागवत मूल पाठ का एतिहासिक विराट आयोजन होगा। इसमें 108 वाणी पाठक बैठेंगे एवं निरन्तर वाणी पाठ करेंगे। इसी तरह पुष्कर से आने वाले 108 विद्धान भागवत का मूल पाठ करेंगे। इन 108 भागवत का पूजन 108 यजमान परिवार करेंगे। इस सप्ताह में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा एवं सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। वाणीजी का प्रवचन आचार्य श्री रामदयालजी महाराज के मुखारबिंद से होगा। श्रीमद् भागवत कथा का वाचन संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना द्वारा किया जाएगा। जो साधक वाणीजी का पाठ करना चाहते हो या भागवत पूजन के लिएयजमान बनने के इच्छुक हो वह चातुर्मास समिति से सम्पर्क कर सकते है।

आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।

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