शेखावाटी में शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी का अभूतपूर्व जलवा — वीर दुर्गादास राठौड़ की जयंती पर युवाओं में फूंकी नई ऊर्जा

– संचित माथुर –

डीडवाना, 14 अगस्त। शेखावाटी की ऐतिहासिक, वीरभूमि गुरुवार को एक असाधारण क्षण की साक्षी बनी, जब शिव विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय जननायक एवं युवा नेता रविन्द्र सिंह भाटी का सीकर से डीडवाना प्रवास एक ऐतिहासिक जनउत्सव में परिवर्तित हो गया। यह यात्रा मूलतः वीर दुर्गादास राठौड़ जयंती समारोह में सहभागिता हेतु थी, किन्तु रास्ते भर जिस अनुपम जनसमर्थन, उत्साह और सम्मान के साथ भाटी का स्वागत हुआ, उसने पूरे शेखावाटी क्षेत्र में राजनीतिक एवं सामाजिक हलचल पैदा कर दी।

यात्रा बनी जनसैलाब का प्रतीक

सुबह सीकर से डीडवाना के लिए रवाना हुए विधायक भाटी के स्वागत में मार्ग के प्रत्येक प्रमुख कस्बे और गाँव में समर्थकों एवं स्थानीय नागरिकों का सैलाब उमड़ पड़ा। सांवली, दुजोद, काशी का वास, मूंडवाड़ा, बाडलवास, कंवरपुरा, खुड़, भगतपुरा, सांगलिया धुणी, ख़ानडी, लोसन, सिंगरावट, सुदरासन, बनवासा चौराहा, दीनदारपुरा, चोलुखन और अंत में डीडवाना—हर स्थान पर ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों, पुष्पवर्षा और पारंपरिक स्वागत से पूरा माहौल उल्लास और गर्व से भर गया।

समर्थकों के हाथों में झंडे, बैनर और पोस्टर लहराते रहे, वहीं युवाओं के जोशपूर्ण नारे और बुजुर्गों के आशीर्वाद ने स्वागत को और भी विशेष बना दिया। स्थानीय महिलाओं ने जगह-जगह मंगल-गीत और आरती से स्वागत कर परंपरा एवं आधुनिक नेतृत्व का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

डीडवाना में रहमान गेट से विशाल वाहन रैली

डीडवाना पहुंचते ही रहमान गेट से प्रारंभ हुई भव्य वाहन रैली ने मानो जनसैलाब का रूप धारण कर लिया। सैकड़ों कारें, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, जीपें और मोटरसाइकिलें एक लम्बे काफिले में परिवर्तित हो गईं। सड़कों के दोनों ओर खड़े लोग पुष्पवर्षा कर रहे थे और लगातार जयकारे गूंज रहे थे। यह दृश्य केवल स्वागत का नहीं बल्कि भाटी के प्रति पूरे शेखावाटी के गहरे स्नेह और विश्वास का प्रमाण था।

लोसल में बचपन की स्मृतियों से सजी मुलाकात

प्रवास के दौरान लोसल पहुंचकर भाटी अपने बचपन के विद्यालय भी गए। यहां उन्होंने अपने गुरुजनों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने अपने छात्र जीवन की प्रेरणादायक घटनाएं साझा करते हुए कहा, “शिक्षा ने ही मुझे आज यहाँ तक पहुँचाया है। गुरु का आशीर्वाद और विद्यालय की दी गई मूल्य-शिक्षा ही व्यक्ति को राष्ट्र-निर्माण के मार्ग पर अग्रसर करती है।” यह मुलाकात केवल एक व्यक्तिगत क्षण नहीं थी, बल्कि शिक्षा और संस्कार के महत्व का संदेश भी दे रही थी।

वीर दुर्गादास राठौड़ जयंती — शौर्य और राष्ट्रभक्ति का अमर संदेश

डीडवाना में आयोजित वीर दुर्गादास राठौड़ जयंती समारोह में मुख्य मंच पर पहुँचते ही जनसमूह ने गगनभेदी नारों के साथ भाटी का स्वागत किया। कार्यक्रम में राजस्थान की उपमुख्यमंत्री श्रीमती दिया कुमारी, पूर्व मंत्री एवं पूर्व खंडेला विधायक प्रेम सिंह बाजौर सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

भाटी ने अपने उद्बोधन में वीर दुर्गादास राठौड़ के जीवन और योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा, “वीर दुर्गादास राठौड़ केवल मारवाड़ या राजस्थान के नहीं, पूरे भारत के शौर्य और राष्ट्रनिष्ठा के प्रतीक हैं। उन्होंने औरंगज़ेब जैसे शक्तिशाली शासक के सामने झुकने की बजाय स्वाभिमान और धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन अर्पित किया। उनकी रणनीति, दूरदृष्टि और निष्ठा से हमें सीखना चाहिए कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य और राष्ट्रहित से समझौता नहीं करना चाहिए।”

उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए यह भी कहा , “आज हमारे सामने चुनौतियाँ अलग हैं, परंतु साहस, निष्ठा और त्याग की आवश्यकता उतनी ही है जितनी दुर्गादास जी के समय थी। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर भ्रष्टाचार, सामाजिक बुराइयों और राष्ट्रविरोधी प्रवृत्तियों के खिलाफ खड़े होने का संकल्प लेना होगा।”

शेखावाटी दौरा — राजनीतिक संदेश और जनजागरण का नया अध्याय

भाटी के इस दौरे ने स्पष्ट कर दिया कि उनका प्रभाव केवल शिव विधानसभा तक सीमित नहीं, बल्कि शेखावाटी के कोने-कोने में गूंज रहा है। जिस तरह विभिन्न जाति, वर्ग और आयु के लोगों ने उनका स्वागत किया, वह उनके सर्वसमावेशी नेतृत्व का प्रमाण है।

यह दौरा एक ओर जहाँ वीर दुर्गादास राठौड़ के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बना, वहीं दूसरी ओर इसने शेखावाटी क्षेत्र में राजनीतिक चेतना और जनजागरण का नया अध्याय खोला। पूरे दिन का यह कार्यक्रम इस बात का प्रतीक बन गया कि जनता के दिलों में स्थान पाने के लिए सच्चा जनसंपर्क, ईमानदार छवि और निरंतर जनसेवा ही सबसे बड़े हथियार हैं।

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