राष्ट्र में थिएटर की संवेदना और चुनौतियां एक समान : बोराणा 

जयपुर। धरती पर स्वर्ग का अहसास कराती कश्मीर की वादियां न केवल प्राकृतिक रूप से सुंदर हैं बल्कि यहाँ की कला संस्कृति भी बहुत समृद्ध और आनंद प्रदान करने वाली है I

प्रदेश के वरिष्ठ नाट्यधर्मी और संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष रमेश बोराणा ने अपने आठ दिवसीय कश्मीर सांस्कृतिक अध्ययन व भ्रमण से लौटने के बाद कहा कि पूरे देश में थिएटर की संवेदना और चुनौतियां लगभग एक समान ही है।

बोराणा ने कश्मीर के कौशुर फाउंडेशन एवं एकेडमी ऑफ़ आर्ट्स द्वारा श्रीनगर की कल्चर ऐकेडमी में आयोजित अंतरराज्य सांस्कृतिक आदान प्रदान समारोह के विशेष इंट्रेक्शन सत्र को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए राजस्थान रंगमंच के विभिन्न स्वरूप, आयामों व कठिनाइयों पर विस्तार से कश्मीरी कला जगत को अवगत कराया तथा प्रदेश के पारंपरिक व लोकनाट्य शैली की विशेषताओं तथा लोक गायकी व पारंपरिक नृत्य प्रकारों का परिचय कराते हुए कहा कि ये विधाएं जीवन का हिस्सा है जो मनुष्य को सहज व सुगम बनाते है।

राजस्थान के धोरों व कश्मीर के पहाड़ों के प्राकृतिक स्वरूप की कलात्मक व्याख्या करते हुए बताया कि पहाड़ के लोग धीरे बोलते हैं जबकि डेजर्ट के लोगों का ध्वनि लेवल लाउड होता है I आपको सुंदरता प्रकृति ने दी है लेकिन हमने जीवन में रंग अपनी जीवटता से भरे हैं।

प्रमुख रंग निर्देशक श्री मंज़ूर अहमद मीर की अध्यक्षता में आयोजित सेमिनार में भारतीय रंगमंच में कश्मीर थिएटर के योगदान को रेखांकित करते हुए बोराणा ने कहा कि भारतीय रंगमंच में कश्मीरी नाट्य धर्मियों का रचनात्मक योगदान महत्वपूर्ण और स्मरणीय है I चाहे वो परम्परिक एवं लोक रंगमंच हो या आधुनिक थिएटर, सार्वकालिक प्रासंगिक और अपनी सौंधी महक बिखेरता रहा है I आगा हश्र कश्मीरी से लेकर सैय्यद मेंहदी हसन, बेताब देहलवी, सआदत हसन मंटों, अली मोहम्मद लोन, पुष्कर भान, सुभाष, मोती लाल केमू, प्राण किशोर कौल, साजद बख्शी, कृष्ण चंदर, राजेंद्रसिंह बेदी तथा कश्मीर के पुराने लोक थिएटर में ‘सुल्तान भगत’ और ‘मोहम्मद सुभान भगत’ जैसे पारंपरिक ‘भांड’लोक कलाकारों ने मौखिक परंपरा और लोक-नाट्य को जिंदा रखा है । वहीं आधुनिक व समकालीन रंगमंच में सर्व श्री एम. के. रैना, बंशीकौल, मुश्ताक काक, अरशद मुश्ताक, मुश्ताक अली अहमद ख़ान, हकीम जावेद, मकन लाल सराफ़, बलवंत ठाकुर, मंज़ूर अहमद मीर व अन्य प्रमुख हैं।

सम्मेलन सत्र में राजस्थान संगीत नाटक अकादमी की निवर्तमान अध्यक्ष श्रीमती बिनाका मालू ने राज्य की विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों व योजनाओं से अवगत कराया तथा अपने सांस्कृतिक अनुभव साझा किए।

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में राजस्थान कश्मीर कल्चरल एक्सचेंज, कश्मीर में थिएटर की मौजूदा हालत, आर्टिस्टिक सहयोग को बढ़ावा देने, कल्चरल विरासत को बचाने और कश्मीर और बाकी भारत के बीच मजबूत कल्चरल पुल बनाने, कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों और परफॉर्मिंग आर्ट्स सेक्टर को और अधिक मजबूत करने की ज़रूरी कोशिशों पर वृहद चर्चा की गयी।

बोराणा ने इस संस्कृति भ्रमण को अल्हादित करने वाला रचनात्मक आंदोलन बताते हुए कहा कि प्रकृति दर्शन के साथ ही स्थानीय संस्कृति और थिएटर को नज़दीक से समझने का ये एक महत्वपूर्ण सुअवसर था।

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