ग्लैमर के बीच अपनी जड़ों से जुड़े रहने पर अंगद हसीजा: “याद रखता हूं कि मैंने शुरुआत कहां से की थी”

– Sanchit Mathur –

मुंबई! एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री कितनी भी तेजी से बदल रही हो, लेकिन अंगद हसीजा के लिए जमीन से जुड़े रहना कभी सफलता या लोकप्रियता पर निर्भर नहीं रहा। अभिनेता का मानना है कि परिवार, अपनी जड़ों से जुड़ाव और अर्थपूर्ण कहानियां आज भी उनकी निजी जिंदगी के साथ-साथ उनके कलाकार के तौर पर लिए जाने वाले फैसलों को भी दिशा देती हैं।

जब अंगद से पूछा गया कि वह इतिहास की किस शख्सियत का किरदार निभाना चाहेंगे, तो उन्होंने किसी बड़े राजा या योद्धा के बजाय उन गुमनाम नायकों को चुना, जिनकी कहानियां लोगों तक कम पहुंची हैं। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा अपने देश के इतिहास के उन आम और गुमनाम नायकों की कहानियों की ओर ज्यादा आकर्षित रहा हूं, जिनके बारे में ज्यादा बात नहीं हुई, बजाय सिर्फ बड़े राजाओं या योद्धाओं की कहानियों के।”

अंगद की इच्छा है कि वह कभी ऐसे ही किसी भूले-बिसरे नायक की कहानी पर्दे पर लेकर आएं। उन्होंने कहा, “मैं किसी ऐसे वास्तविक स्वतंत्रता सेनानी का किरदार निभाना चाहूंगा, जिसकी कहानी को अब तक पर्दे पर ज्यादा नहीं दिखाया गया है।”

वह खास तौर पर युवा क्रांतिकारियों और विभाजन के दौर के स्थानीय नेताओं की कहानियों से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा, “कोई युवा क्रांतिकारी या विभाजन के दौर का कोई स्थानीय नेता। उस समय की जबरदस्त दृढ़ता, परिवार से ऊपर देश को चुनने का भावनात्मक संघर्ष और देशभक्ति की सच्ची भावना ऐसी चीजें हैं, जिन्हें मैं एक्सप्लोर करना चाहता हूं।”

उनका मानना है कि ऐसे किरदार को पर्दे पर निभाना सम्मान के साथ-साथ एक बड़ी चुनौती भी होगा। अंगद ने कहा, “इस तरह के गहरे और जमीन से जुड़े मानवीय संघर्ष को पर्दे पर जीवंत करना मेरे लिए बेहद सम्मान की बात होगी और साथ ही अभिनय के लिहाज से भी एक बड़ी चुनौती होगी।”

तेजी से बदलती एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बीच अंगद का कहना है कि उन्होंने खुद को वास्तविकता से जोड़े रखने के तरीके हमेशा बनाए रखे हैं। उन्होंने कहा, “एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री बहुत तेजी से आगे बढ़ती है। ग्लैमर, ट्रेंड्स और लगातार बने रहने वाले शोर में बह जाना बहुत आसान है।”

उनके लिए जमीन से जुड़े रहने का सबसे बड़ा सहारा परिवार और आध्यात्मिक दिनचर्या है। उन्होंने कहा, “जमीन से जुड़े रहना मेरे लिए परिवार और मेरी आध्यात्मिक दिनचर्या से आता है। आप चाहे कितने भी व्यस्त या मशहूर क्यों न हो जाएं, जब आप घर जाते हैं, तो आप सिर्फ एक बेटा, भाई या दोस्त होते हैं।”

चंडीगढ़ और अपनी पंजाबी जड़ों से जुड़ाव भी उनके लिए बेहद खास है। अंगद ने कहा, “मैं अपने होमटाउन चंडीगढ़ और अपनी पंजाबी जड़ों से जुड़े रहने की पूरी कोशिश करता हूं। यह याद रखना कि मैंने शुरुआत कहां से की थी, मुझे जमीन से मजबूती से जोड़े रखता है, फिर चाहे इंडस्ट्री आपको कितनी भी ऊंचाई पर क्यों न ले जाए।”

जब उनसे पूछा गया कि उनके किस किरदार ने भारतीय मूल्यों को सबसे बेहतर तरीके से दर्शाया, तो उनके जेहन में तुरंत ‘सपना बाबुल का…बिदाई’ के अलेख का नाम आया। उन्होंने कहा, “मुझे अलेख के किरदार के पास वापस जाना होगा, जो मैंने ‘सपना बाबुल का…बिदाई’ में निभाया था।”

हालांकि अलेख का किरदार भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों से जूझता था, लेकिन पूरी कहानी में पारिवारिक रिश्तों और मूल्यों को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया था। अंगद ने कहा, “उस पूरे शो की बुनियाद भारतीय पारिवारिक मूल्यों, निस्वार्थ प्रेम और त्याग पर टिकी हुई थी।”

उन्हें खास तौर पर अलेख को उसके परिवार से मिलने वाला बिना शर्त समर्थन याद है। उन्होंने कहा, “जिस तरह उसका परिवार, खासकर उसकी पत्नी साधना, उसके सबसे मुश्किल दौर में उसके साथ खड़ी रही, वह भारतीय परंपरा में शादी की पवित्रता और पारिवारिक रिश्तों की अहमियत में गहरे विश्वास को दर्शाता था।”

पीछे मुड़कर देखते हुए अंगद कहते हैं कि दर्शकों से मिले प्यार ने इस अनुभव को उनके लिए और भी खास बना दिया। उन्होंने कहा, “पूरे भारत के परिवारों से उस किरदार को इतना प्यार और सम्मान मिलता देख मुझे बेहद गर्व महसूस हुआ। मुझे गर्व था कि मैं ऐसी कहानी का हिस्सा था, जिसने हमारी भावनात्मक और पारिवारिक मूल्यों की जड़ों को सेलिब्रेट किया।”

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