स्वर्णिम उड़ान 2047 : भारत को वैश्विक गोल्ड हब बनाने का विज़न : सचिन जैन

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने पेश किया 2047 तक भारत की स्वर्ण अर्थव्यवस्था का रोडमैप

मुंबई। भारत को वर्ष 2047 तक विकसित भारत (Viksit Bharat) के लक्ष्य के अनुरूप वैश्विक स्वर्ण अर्थव्यवस्था का अग्रणी देश बनाने की दिशा में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) ने अपनी ऐतिहासिक रिपोर्ट “स्वर्णिम उड़ान 2047” जारी की है। मॉनिटर डेलॉइट (Monitor Deloitte) के नॉलेज पार्टनरशिप में तैयार इस रिपोर्ट में सोने को केवल आभूषण या निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक मजबूती, औद्योगिक विकास, निर्यात, नवाचार और वित्तीय सुरक्षा का रणनीतिक राष्ट्रीय संसाधन बताया गया है।

WGC की रिपोर्ट के अनुसार यदि भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ता है, तो स्वर्ण क्षेत्र देश की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता, उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing), वित्तीय लचीलापन और घरेलू मूल्य संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित नीतिगत एवं संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

भारत वैश्विक स्वर्ण अर्थव्यवस्था का केंद्र बनेगा

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड टैट ने कहा कि भारत पहले से ही वैश्विक स्वर्ण बाजार का महत्वपूर्ण केंद्र है और आने वाले वर्षों में उसकी भूमिका और अधिक मजबूत होगी।

उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, गहराते वित्तीय बाजारों और नई तकनीकों के दौर में सोना केवल निवेश या आभूषण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक नवाचार, आर्थिक सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता का भी प्रमुख आधार बनेगा। “स्वर्णिम उड़ान 2047” भारत के स्वर्ण बाजार को आधुनिक, पारदर्शी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करती है।

‘सोने की चिड़िया’ बनने की नई उड़ान

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल इंडिया के रीजनल सीईओ सचिन जैन ने कहा कि भारत की संस्कृति और अर्थव्यवस्था में सोने का विशेष स्थान रहा है। अब समय आ गया है कि इसे एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में विकसित किया जाए।

उन्होंने कहा कि खनन, रीसाइक्लिंग, गोल्ड फाइनेंशियलाइजेशन, आभूषण उद्योग, निर्यात और नवाचार में समन्वित प्रयासों से सोना विकसित भारत के निर्माण में बड़ी भूमिका निभा सकता है। “स्वर्णिम उड़ान 2047” भारत की “सोने की चिड़िया” बनने की उसी नई यात्रा का प्रतीक है, जो परंपरा, तकनीक और राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा का संगम है।

डेलॉइट ने तैयार किया विकास का खाका

मॉनिटर डेलॉइट दक्षिण एशिया के पार्टनर हर्ष कपूर ने कहा कि यह रिपोर्ट सोने को केवल “स्टोर ऑफ वैल्यू” नहीं, बल्कि भारत की भविष्य की अर्थव्यवस्था का रणनीतिक इंजन मानती है। रिपोर्ट में नीति सुधार, संस्थागत समन्वय और नवाचार के माध्यम से पूरे स्वर्ण क्षेत्र में दीर्घकालिक मूल्य सृजन का रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।

रिपोर्ट के पांच प्रमुख स्तंभ

‘माइन इन इंडिया’ को बढ़ावा

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि वर्ष 2047 तक भारत अपनी कुल वार्षिक स्वर्ण मांग का 10-15 प्रतिशत घरेलू खनन से पूरा करे। इसके लिए सोने को MMDR अधिनियम के तहत ‘स्ट्रेटेजिक मिनरल’ घोषित करने, अन्वेषण को बढ़ावा देने, मंजूरी प्रक्रिया सरल बनाने, आधुनिक भू-वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध कराने और तकनीकी दक्ष मानव संसाधन तैयार करने की सिफारिश की गई है।

भारत बने ‘ज्वेलर टू द वर्ल्ड’

रिपोर्ट का लक्ष्य 2047 तक भारत को दुनिया का सबसे बड़ा स्वर्ण आभूषण निर्यातक बनाना है। इसके लिए पारंपरिक प्रवासी बाजारों से आगे बढ़कर नए वैश्विक बाजारों में प्रवेश, स्थानीय पसंद के अनुरूप डिजाइन, “मेड इन इंडिया” ब्रांडिंग, आधुनिक ज्वेलरी क्लस्टर, कारीगरों का कौशल विकास तथा ‘करिगर कनेक्ट’, गोल्ड ज्वेलरी टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड और इंडिया गोल्ड फैशन वीक जैसी पहल प्रस्तावित की गई हैं।

गोल्ड फाइनेंशियलाइजेशन

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय परिवारों के पास लगभग 31,000 टन सोना है, जिसकी अनुमानित कीमत 314.9 लाख करोड़ रुपये (3.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) है। यदि हर वर्ष इस निष्क्रिय सोने का केवल 1 प्रतिशत भी औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में लाया जाए तो करीब 3.1 लाख करोड़ रुपये के स्वर्ण आयात की आवश्यकता कम हो सकती है। इसके लिए बैंकों की सक्रिय भागीदारी और बुलियन बैंकिंग सुधारों की आवश्यकता बताई गई है।

नई पीढ़ी के लिए आधुनिक ज्वेलरी

भारत की 38 करोड़ से अधिक जनरेशन-ज़ेड आबादी को ध्यान में रखते हुए फिजिटल (Physical + Digital) रिटेल, आधुनिक डिजाइन, मजबूत हॉलमार्किंग, ट्रेसबिलिटी और दैनिक जीवन में उपयोग योग्य ज्वेलरी पर जोर देने की सिफारिश की गई है।

रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में सोना

रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग वैश्विक औद्योगिक स्वर्ण मांग का लगभग 80 प्रतिशत उपयोग करता है। वर्ष 2047 तक भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 750 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में सोना इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, डायग्नोस्टिक्स, एयरोस्पेस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

तीन बड़े संस्थागत सुधारों का प्रस्ताव

रिपोर्ट में प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तीन प्रमुख संस्थागत पहल सुझाई गई हैं—

  • नेशनल गोल्ड बोर्ड का गठन, जो नीति समन्वय, नियामकीय सुधार, बाजार अवसंरचना और क्रियान्वयन की निगरानी करेगा।
  • गोल्ड इनोवेशन सेंटर की स्थापना, जो अनुसंधान, तकनीक, डिजिटलीकरण, स्थिरता और कौशल विकास को बढ़ावा देगा।
  • मल्टी-स्टेकहोल्डर टास्क फोर्स, जो “स्वर्णिम उड़ान 2047” के रोडमैप को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी।

भारत की स्वर्ण अर्थव्यवस्था की नई दिशा

“स्वर्णिम उड़ान 2047” केवल एक रिपोर्ट नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक स्वर्ण शक्ति बनाने का दीर्घकालिक विज़न है। यदि इसमें सुझाए गए सुधार समयबद्ध तरीके से लागू होते हैं, तो सोना केवल निवेश और आभूषण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की आर्थिक प्रगति, रोजगार, निर्यात, तकनीकी विकास और आत्मनिर्भरता का एक मजबूत आधार बन सकता है।

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