प्रधानमंत्री जनधन योजना के 12 साल पूरे, 59 करोड़ से अधिक खाते खुले
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री जनधन योजना ने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 28 अगस्त 2014 को शुरू की गई यह योजना देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाली प्रमुख सरकारी पहलों में शामिल है। सरकार के अनुसार, योजना के तहत 19 अगस्त 2026 तक 59.09 करोड़ जनधन खाते खोले जा चुके हैं। इनमें 32.92 करोड़ खाते महिला लाभार्थियों के हैं।

PIB के मुताबिक, जनधन खातों में कुल जमा राशि बढ़कर करीब ₹3.17 लाख करोड़ हो गई है। वहीं ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खातों की संख्या 45.95 करोड़ तक पहुंच गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग सेवाओं की पहुंच देश के उन वर्गों तक भी बढ़ी है, जो पहले औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से दूर थे।
डिजिटल भुगतान और सरकारी योजनाओं को मिला आधार
जनधन योजना ने बैंकिंग सेवाओं के साथ-साथ डिजिटल भुगतान, बीमा, पेंशन और सरकारी लाभों की सीधे लाभार्थियों तक पहुंच को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार के अनुसार, JAM यानी जनधन-आधार-मोबाइल व्यवस्था के माध्यम से विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिली है।
योजना के तहत जारी किए गए रुपे कार्डों ने भी डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच को विस्तार दिया है। PIB के अनुसार अब तक 41 करोड़ से अधिक रुपे कार्ड जारी किए जा चुके हैं।
महिलाओं की वित्तीय भागीदारी बढ़ी
जनधन योजना की एक बड़ी उपलब्धि महिलाओं की बैंकिंग व्यवस्था में बढ़ती भागीदारी भी रही है। 19 अगस्त 2026 तक योजना के 32.92 करोड़ खाते महिला लाभार्थियों के नाम हैं। सरकार के अनुसार, यह वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।
12 वर्षों में जनधन योजना ने बैंकिंग को आम नागरिकों तक पहुंचाने के साथ बचत, डिजिटल लेनदेन और सरकारी योजनाओं के लाभ की सीधी पहुंच के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। सरकार इसे भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मानती है।

