मनोरंजन / बाॅलीवुड

“कैंसल कल्चर से डरते हैं सेलेब्रिटीज”: मोहम्मद नागमन लतीफ ने बताया क्यों जरूरी हैं ईमानदार बातचीत

– संचित माथुर – 

मुंबई। सोशल मीडिया और वायरल क्लिप्स के दौर में जहां सेलिब्रिटी इंटरव्यू लगातार ज्यादा सतर्क होते जा रहे हैं, वहीं हूनर टैलेंट हेड मोहम्मद नागमन लतीफ का मानना है कि ऐसे समय में असली और बेबाक बातचीत पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गई है। अपने पॉडकास्ट Honestly, Why Not? के जरिए वह कलाकारों के लिए ऐसा माहौल तैयार करना चाहते हैं, जहां वे बिना इस डर के खुलकर बात कर सकें कि उनकी किसी एक बात को संदर्भ से हटाकर पेश किया जाएगा।

इस सीजन में हुई बातचीत को याद करते हुए मोहम्मद कहते हैं कि हर मेहमान अपने साथ एक अलग ऊर्जा लेकर आया, लेकिन बेसर अली के साथ हुई बातचीत उनके लिए खास रही।

वह कहते हैं, “हर मेहमान बिल्कुल अलग ऊर्जा लेकर आता है, लेकिन बेसर अली के साथ हुई मेरी बातचीत मेरे साथ रह गई। वह शो पर बिल्कुल बिना किसी फिल्टर के आए थे। जब हमने रियलिटी टीवी की दुनिया पर बात की, तो उन्होंने बिना एक पल सोचे उस शख्स का नाम तक लिया, जिसे वह इंडस्ट्री में असल जिंदगी का रेड फ्लैग मानते हैं।”

हालांकि, मोहम्मद के लिए उस बातचीत में सबसे खास बात विवाद नहीं, बल्कि बेसर की स्टारडम को लेकर समझ थी। वह बताते हैं, “जिस चीज ने मुझे सबसे ज्यादा हैरान किया, वह स्टारडम की प्रकृति को लेकर उनकी परिपक्वता थी। उन्होंने खुले तौर पर माना कि हर रियलिटी शो जीतना उनके लिए जरूरी नहीं था और यह उनके लिए एक तरह से वरदान साबित हुआ, क्योंकि इससे उनकी भूख और खुद को एक गंभीर अभिनेता के तौर पर स्थापित करने की प्रेरणा बनी रही।”

मोहम्मद के लिए यह नजरिया काफी ताजगी भरा था। वह कहते हैं, “किसी ऐसे व्यक्ति को देखना, जो बेहद ग्लैमरस रियलिटी टीवी की दुनिया का हिस्सा रहा हो, लेकिन इसके बावजूद डिजिटल वैलिडेशन के पीछे भागने के बजाय अपनी आंतरिक शांति और लंबे समय तक टिकने वाले करियर को प्राथमिकता देने की बात करे, मेरे लिए बेहद रिफ्रेशिंग था।”

हूनर में उनका काम भी कलाकारों के इंटरव्यू लेने के तरीके को प्रभावित करता है। मोहम्मद कहते हैं, “बालाजी टेलीफिल्म्स, मोशन पिक्चर्स और डिजिटल में हूनर के साथ मेरी भूमिका मुझे कलाकारों की सोच और उनके मनोविज्ञान को करीब से समझने का एक अनोखा मौका देती है।”

वह बताते हैं कि दर्शकों के विपरीत उन्हें कलाकारों के संघर्ष का वह हिस्सा देखने को मिलता है, जो कैमरे के सामने नजर नहीं आता।

“मैं उन्हें ऑडिशन देते समय देखता हूं, कॉन्ट्रैक्ट साइन करते समय देखता हूं और सही किरदार पाने के लिए संघर्ष करते हुए भी देखता हूं। मैं उन्हें सिर्फ टेलीविजन या ओटीटी पर दिखने वाले ग्लैमरस रूप में नहीं देखता। मैं उनकी कच्ची क्षमता और उस मेहनत को देखता हूं, जो उन्हें एक बेहतर कलाकार बनने के लिए करनी पड़ती है,” वह कहते हैं।

यही समझ उनके सवालों को भी प्रभावित करती है। मोहम्मद के मुताबिक, वह सिर्फ सतही सवाल पूछने के बजाय कलाकार की चिंताओं, महत्वाकांक्षाओं और इंडस्ट्री के बिजनेस पक्ष को ध्यान में रखकर बातचीत करते हैं।

वह कहते हैं, “क्योंकि मैं उनकी चिंताओं, महत्वाकांक्षाओं और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बिजनेस पक्ष को समझता हूं, इसलिए मेरे सवाल सिर्फ सतह तक सीमित नहीं रहते। मैं गहरी इंडस्ट्री समझ के साथ सवाल पूछता हूं और इससे कलाकार को तुरंत महसूस होता है कि मैं उनकी भाषा समझता हूं।”

हालांकि मोहम्मद मुश्किल सवाल पूछने से पीछे नहीं हटते, लेकिन उनके लिए सम्मान से समझौता करना कभी विकल्प नहीं है। उनके मुताबिक, किसी भी बातचीत में सवाल पूछने के पीछे की मंशा सबसे ज्यादा मायने रखती है।

वह कहते हैं, “इरादा ही सब कुछ है। अगर आप सिर्फ ड्रामा पैदा करने के लिए कोई बोल्ड या असहज सवाल पूछेंगे, तो मेहमान तुरंत आपकी मंशा समझ जाएगा और खुलकर बात करना बंद कर देगा। लेकिन अगर कोई मुश्किल सवाल इसलिए पूछा जाए क्योंकि उससे उनके सफर या इंडस्ट्री की कोई असली सच्चाई सामने आती है, तो वह बातचीत एक बौद्धिक चर्चा में बदल जाती है।”

मोहम्मद यह भी मानते हैं कि अगर उन्हें किसी जवाब में टालमटोल नजर आती है, तो वह उसे सीधे तौर पर सामने रखने से नहीं हिचकते।

वह कहते हैं, “मैं सीधे सवाल करता हूं। अगर मुझे कोई चीज पसंद नहीं आती या मुझे लगता है कि कोई जवाब सवाल से बचने की कोशिश कर रहा है, तो मैं इसके बारे में ईमानदार रहता हूं। लेकिन मेरे पॉडकास्ट की नींव आपसी सम्मान पर टिकी है। आप किसी विवाद या असफलता को गरिमा के साथ समझ सकते हैं, बिना सामने वाले को नीचा दिखाए या उसे कठघरे में खड़ा किए।”

इंडस्ट्री में आए बदलावों पर बात करते हुए मोहम्मद का मानना है कि आज सिर्फ टैलेंट के दम पर आगे बढ़ना काफी नहीं है। वह कहते हैं, “इंडस्ट्री का परिदृश्य काफी बदल गया है और आज के कलाकारों को यह समझना होगा कि सिर्फ टैलेंट अब सफलता की गारंटी नहीं है।”

उनके मुताबिक, डिजिटल विजिबिलिटी और अभिनय क्षमता के बीच संतुलन जरूरी है। “एल्गोरिदम के पीछे आंख बंद करके भागना एक शॉर्ट-टर्म ट्रैप है। सोशल मीडिया आपको विजिबिलिटी दिला सकता है, लेकिन सेट पर आपकी क्षमता यह तय करती है कि आप कितने लंबे समय तक टिकेंगे,” वह कहते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या आज के सेलेब्रिटीज पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क हो गए हैं, तो मोहम्मद का जवाब बिल्कुल स्पष्ट था।

वह कहते हैं, “बिल्कुल। वे कैंसल कल्चर से डरते हैं और उस वायरल क्लिपिंग इंडस्ट्री से भी, जहां 40 मिनट की बातचीत की सिर्फ 10 सेकंड की क्लिप पूरी बातचीत का मतलब बदल सकती है।”

उनका मानना है कि इसी वजह से कई सेलिब्रिटीज अब इंटरव्यू के दौरान पहले से तैयार और बेहद डिप्लोमैटिक नजर आते हैं।

वह कहते हैं, “इसने बहुत से सेलिब्रिटीज को जरूरत से ज्यादा रिहर्स्ड और डिप्लोमैटिक बना दिया है, जो सच कहूं तो देखने में काफी बोरिंग लगता है।”

मोहम्मद के मुताबिक, यही वह वजह है जिसके चलते Honestly, Why Not? को एक अलग तरह के पॉडकास्ट के रूप में देखा जा सकता है। वह कहते हैं, “जब मेहमान मेरे सेट पर आते हैं, तो उन्हें पता होता है कि हम उनकी बातों को संदर्भ से हटाकर एडिट करके कोई विवाद पैदा करने की कोशिश नहीं करेंगे।”

और जब कलाकारों के मन में यह भरोसा बन जाता है, तो बातचीत का अंदाज भी पूरी तरह बदल जाता है। नागमन कहते हैं, “एक बार जब उन्हें एहसास हो जाता है कि यह माहौल सुरक्षित है, तो वे खुशी से अपने गार्ड को नीचे कर देते हैं और दर्शकों के सामने वह कच्ची और ईमानदार बात रखते हैं, जिसका वे लंबे समय से इंतजार कर रहे होते हैं।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *