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जानकारी होना अच्छी बात है, लेकिन जरूरत से ज्यादा जानना परेशानी खड़ी कर सकता है : आदित्य खुराना

मुंबई। अभिनेता आदित्य खुराना, जो इन दिनों क्योंकि रिश्तों के भी रूप बदलते हैं में नजर आ रहे हैं, मानते हैं कि सोशल मीडिया आज रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। लोग अपनी निजी और प्रोफेशनल जिंदगी से जुड़ी लगभग हर छोटी-बड़ी बात सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। आदित्य को भी सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी से जुड़ी चीजें शेयर करने में कोई परेशानी नहीं है, हालांकि वह मानते हैं कि लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करना उनके लिए भी एक आदत और लत बन चुका है।

सोशल मीडिया पर निजी और प्रोफेशनल अपडेट्स साझा करने को लेकर अपनी सहजता के बारे में बात करते हुए आदित्य कहते हैं, “हां, मुझे सोशल मीडिया पर सब कुछ पोस्ट करने में कोई परेशानी नहीं है।”

अभिनेता यह भी मानते हैं कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल अब सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों की रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बन चुका है। अपने अनुभव के बारे में बताते हुए वह कहते हैं, “इसमें कोई शक नहीं है कि यह मेरे लिए भी एक एडिक्शन बन गया है। मैं इस आदत को बदलने की कोशिश कर रहा हूं और उम्मीद है कि जल्द ही मैं इससे छुटकारा पा लूंगा।”

सोशल मीडिया फीड पर लगातार ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं, जिनमें प्राकृतिक आपदाओं, अपराध, राजनीति और जानवरों से जुड़े संवेदनशील मुद्दे शामिल होते हैं। आदित्य का मानना है कि इस तरह की खबरों को हर दिन लगातार देखने का असर व्यक्ति के मन पर पड़ सकता है।

वह कहते हैं, “मुझे लगता है कि दुनिया हर किसी के लिए एक अलग जगह में बदलती जा रही है। इस तरह की खबरों को हर दिन देखना दिमाग के लिए काफी परेशान करने वाला है।”

अभिनेता का मानना है कि सोशल मीडिया का प्रभाव सिर्फ भावनात्मक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। वह कहते हैं, “मुझे लगता है कि इसका असर सिर्फ भावनात्मक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी हुआ है। दुर्भाग्य से कई लोगों ने सोशल मीडिया की वजह से पैदा हुए डिप्रेशन के कारण अपनी जान तक गंवा दी है। जानकारी होना अच्छी बात है, लेकिन जरूरत से ज्यादा जानकारी कई बार परेशानी खड़ी कर देती है। मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि लोगों को यह बात समझनी चाहिए।”

आदित्य के मुताबिक, सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाना जरूरी नहीं है, बल्कि जरूरत इस बात की है कि लोग यह समझें कि उन्हें कहां सीमा तय करनी है। सोशल मीडिया जहां लोगों को दुनिया से जुड़े रहने और जरूरी जानकारी हासिल करने में मदद करता है, वहीं इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल मानसिक शांति पर असर डाल सकता है।

उनका मानना है कि सोशल मीडिया और वास्तविक जिंदगी के बीच एक स्वस्थ संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि जानकारी हासिल करने की चाह व्यक्ति की मानसिक शांति पर भारी न पड़े।

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