धर्म / ज्योतिष

मन की फूटी बाल्टी में संतोष का पैंदा लगा लो जीवन आनंदमय हो जाएगा : आचार्य पुलकसागर

  • बोले आचार्य पुलकसागर भीलवाड़ा में इस बार 18 दिन पर्युषण पर्व की आराधना करेगा जैन समाज
  •  चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव में आचार्य पुलकसागर का प्रेरणादायी उद्बोधन

भीलवाड़ा। इंसान के तन का पेट तो फिर भी भर सकता लेकिन मन का पेट कभी नहीं भरता कितना भी डालो खाली ही रहता है। इंसानी मन उस बाल्टी के समान है जिसका पैंदा फूटा होने से समुद्र का सारा पानी डाल दे तो भी खाली ही रहेगी। सांसारिक सुखों की मृग मरीचिका में भटकने वाला व्यक्ति जिंदगी भर भटकता है लेकिन सुख की प्राप्ति नहीं होती है। मन की फूटी बाल्टी में संतोष का पैंदा लगा लो जीवन आनंदमय हो जाएगा। ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में बुधवार प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संतोष सबसे बड़ा धन है जिसने ये पा लिया उसे अन्य किसी धन को पाने की आवश्यकता नहीं रह जाती। जिनके जीवन में संतोष नहीं उनके मन की फूटी बाल्टी कोई नहीं भर सकता। जीवन में दो शब्द हमेशा याद रखे दुःखी होना है तो ‘ओर’ एवं सुखी होना है तो ‘बस’ को याद रखे। ओर शब्द में कोई फुलस्टॉप नहीं होता जिंदगी भर भटकते रहेंगे एवं बस बोलना सीख गए तो जीवन में आनंद आ जाएगा। ओर शब्द फूटी बाल्टी एवं बस शब्द संतोष का प्रतीक है। आचार्यश्री ने कहा कि संतोष धन जिसके जीवन में आ गया वह पर्णकुटी में भी आनंद के साथ जी सकता है। परमात्मा से ओर मांग कर दुःखी होने की बजाय जो दिया उसमें संतोष करके सुखी जीवन बिताए। जो नहीं मिला उसके लिए आंसू बहाने की बजाय जो मिला है उसके लिए परमात्मा को धन्यावाद देकर सुख से उपभोग करो।

आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जैन समाज के पर्युषण महापर्व आने वाले है। त्याग तपस्याओं की गंगा प्रवाहित होने वाली है। पहले आठ दिन श्वेताम्बर जैन समाज ओर फिर 10 दिन दिगम्बर जैन समाज पर्युषण महापर्व मनाएगा। उन्होंने कहा कि कई लोग पूछते ये पर्युषण अलग-अलग क्यों मनाए जाते तो मैं कहता हूं एक साथ मनाएगा तो दस दिन के ही पर्युषण होंगे लेकिन अलग-अलग मनाते है तो 18 दिन पर्युषण पर्व की आराधना होती है। इस बार मेरा चातुर्मास भीलवाड़ा होने से यहां 18 दिन पर्युषण की आराधना होगी। उनके पर्युषण भी हमारे ओर हमारे पर्युषण भी उनके होंगे।

आचार्य पुलकसागर महाराज ने अपने मन में किसी तरह के गलत विचार को स्थान नहीं देने की अपील करते हुए कहा कि किसी के प्रति मन में एक गलत विचार पूरी जिंदगी बर्बाद कर देता है। जब भी मन में गलत विचार आए उसे वहीं कुचल दे ओर पल्लवित नहीं होने दे। एक गलत विचार सारे रिश्तों व दोस्ती पर पानी फेर सकता है। एक गलत विचार भक्त व भगवान का रिश्ता बिगाड़ देता है।

आचार्यश्री ने कहा कि चिता मुर्दे को जलाती है पर चिंता जीते जी खोखला कर देती है। व्यक्ति की जिंदगी में एक पल की खबर नहीं पर वह 100 वर्ष का सामान जुटाने में लगा हुआ है। व्यक्ति के शरीर की बीमारी का उपचार हो सकता पर मन की बीमारी का कोई उपचार नहीं है। जिंदगी में कल की चिंता छोड़ आज में जीना सीख ले।

प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन एवं आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य महेन्द्रकुमार दीपक दिवित सोगानी परिवार ने प्राप्त किया। समाजसेवी गोविन्द सोड़ाणी ने आचार्य श्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा आदि पदाधिकारियों ने किया। त्रिशला महिला मण्डल की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। आठ वर्षीय बालिका तक्ष्वी सोड़ाणी ने शिव पुराण मंत्रों की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह ने किया। भीलवाड़ा शहर एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग ज्ञान की गंगा में डूबकी लगाने के लिए चित्रकूटधाम पहुंचे थे। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन हो रहे है। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *