पुत्रों के लिए भाजपा नेताओं की ‘तड़प’ और मुख्यमंत्री के दोहरे मापदंड का केंद्र बना RCA: टीकाराम जूली
जो ‘सुबह का बोला शाम को भूल जाए’ उसे क्या कहते हैं मुख्यमंत्री जी ?
जयपुर। नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) की एडहॉक कमेटी में किए गए बदलावों पर मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि एक प्रसिद्ध कहावत है कि ‘सुबह का भूला अगर शाम को घर आ जाए, तो उसे भूला नहीं कहते’, लेकिन मुख्यमंत्री जी, ‘जो सुबह का बोला शाम होते-होते भूल जाए, उसे क्या कहते हैं?’
श्री जूली ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज सुबह तक मुख्यमंत्री जी सार्वजनिक मंचों से ‘बेटों की लॉन्चिंग’ और परिवारवाद पर नैतिकता का बड़ा ज्ञान दे रहे थे, लेकिन शाम होते-होते उनकी ही सरकार ने भाजपा के दिग्गज नेताओं के बेटों की पूरी कतार को उपकृत कर दिया। *उन्होंने मुख्यमंत्री को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि जिनके अपने घर शीशे के होते हैं, उन्हें दूसरों के घरों पर पत्थर फेंकने की राजनीति शोभा नहीं देती।* आज प्रदेश की जनता ने भाजपा नेताओं की अपने पुत्रों को स्थापित करने की छटपटाहट और तड़प को प्रत्यक्ष देख लिया है।
क्रिकेट एसोसिएशन को बनाया ‘लॉन्च पैड’ :
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन, जो प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को निखारने का मंच होना चाहिए था, उसे अब भाजपा के रसूखदार नेताओं के बेटों के लिए एक सुरक्षित ‘लॉन्च पैड’ में तब्दील कर दिया गया है। एडहॉक कमेटी के कन्वीनर पद पर भाजपा विधायक श्री जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव की नियुक्ति इस बात की तस्दीक करती है कि सरकार के लिए मेरिट नहीं, बल्कि राजनैतिक रसूख सर्वोपरि है। श्री जूली ने स्पष्ट किया कि खेल संस्थाओं में इस तरह का हस्तक्षेप राजस्थान के गौरवशाली खेल इतिहास के साथ एक भद्दा मजाक है।
नियुक्तियों में झलका केवल खास परिवारों का प्रभुत्व :
कमेटी के पुनर्गठन पर सवाल उठाते हुए श्री जूली ने कहा कि पूर्व मंत्री श्री चंद्रराज सिंघवी के पोते अरिष्ट सिंघवी और विधायक श्री संजीव बेनीवाल के बेटे अर्जुन बेनीवाल को सदस्य बनाकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि आम कार्यकर्ता के लिए भाजपा के दरवाजे बंद हैं और केवल बड़े नेताओं के वंशजों के लिए ही पद आरक्षित हैं। उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर और सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे श्री आशीष तिवाड़ी को पुनः जगह देना यह साबित करता है कि भाजपा में परिवारवाद का संक्रमण जड़ों तक फैल चुका है। यह नियुक्तियां खेल भावना की हत्या हैं और प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों के साथ सरासर अन्याय है।
